उत्तर प्रदेश पशु प्रजनन नीति-2018

उद्देश्यः

1              क्षेत्र विशेष की आवश्यकता के अनुरूप वीर्य की आपूर्ति सुनिश्चित किया जाना।   

2              भारतीय मूल के गोवंशीय/महिषवंशीय प्रजातियों का संरक्षण एवं संबर्धन।

3              गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशुओं का दुग्ध उत्पादन बढ़ाना।

4             राजकीय पशुधन प्रक्षेत्रों पर प्रजातिवार उच्च गुणवत्तायुक्त प्रजनन योग्य नर वत्सों को उत्पन्न कर अतिहिमीकृत वीर्य उत्पादन एवं नैसर्गिक अभिजनन हेतु उपयोग किया जायेगा।

रणनीतिः

1              विदेशी प्रजातियों का विभिन्न पशु रोगों के प्रति संवेदनशील होने के कारण प्रदेश की जलवायु आधारित एवं क्षेत्र विशेष के अनुकूल स्वदेशी प्रजातियों यथा साहीवाल, हरियाना, थारपारकर, गंगातीरी एवं गिर को क्षेत्र विशेष/जलवायु अनुकूलन के आधार पर बढ़ावा दिया जायेगा तथा पशुपालकों की माँग के अनुरूप गिर प्रजाति को प्रदेश में प्रजनन की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी।

2              स्वदेशी नस्ल का अपग्रेडेशन एवं सेलेक्टिव ब्रीडिंग के माध्यम से संरक्षण एवं सम्बर्धन पर विशेष ध्यान दिया जायेगा।

3              स्वदेशी प्रजातियों के सेक्स्ड सार्टेड सीमेन (वर्गीकृत वीर्य) की प्रदेश में उपलब्धता सुनिश्चित कर व्यापक प्रचार प्रसार के माध्यम से उपयोग पर बल दिया जायेगा ताकि अधिक उन्नतशील मादा संतति की प्राप्ति संभव हो सके।

4              बुन्देलखण्ड क्षेत्र में साहीवाल गाय का अतिहिमीकृत/वर्गीकृत वीर्य की उपलब्धता सुनिश्चित कराने से पूर्व साहीवाल गाय की उम्र, औसत दुग्ध उत्पादन प्रति दिन, दुग्धावस्था अवधि, थनैला रोग की प्रवृत्ति, वसा प्रतिशत, एवं प्रथम ऋतुकाल की आयु की जानकारी/सूचना का अभिलेखीकरण करते हुए कृत्रिम गर्भाधान से आच्छादित किया जायेगा।

5              बुन्देलखण्ड क्षेत्र में लगभग एक ही रंग की गिर तथा साहिवाल प्रजाति होने के कारण इन प्रजाति की गायों में कृत्रिम गर्भाधान में विषेष सतर्कता बरती जायेगी ताकि किसी एक प्रजाति के वीर्य स्ट्राज का उपयोग दूसरी प्रजाति में न हो तथा शुद्ध जर्मप्लाज्म को नष्ट होने से बचाया जा सके।

6              उक्त के साथ ही साथ बुन्देलखण्ड क्षेत्र में गिर/साहीवाल नस्ल से उत्पन्न नरवत्सों का बधियाकरण नियमित रूप से किया जायेगा ताकि अनियंत्रित पशु प्रजनन पर रोक लगाकर शुद्ध जर्मप्लाज्म को नष्ट होने से बचाया जा सके।

7              विदेशी नस्ल के रूप में जर्सी एवं जर्सी क्रास प्रजाति को बढ़ावा दिया जायेगा ताकि पशुपालकों को उनके दुग्ध उत्पादन का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।

8              संकर प्रजनन में विदेशी नस्ल का रक्त प्रतिशत अधिकतम 62.5 तक ही रखा जायेगा परन्तु प्रदेश में उपलब्ध शुद्ध विदेशी नस्ल यथा एच.एफ. व एच.एफ. क्रास पशुओं में एच0एफ0 नस्ल के शुद्ध या क्रासब्रेड वीर्य की उपलब्धता पशुपालकों की आवश्यकता व मांग के अनुरूप उपलब्ध करायी जायेगी।

9              अधिक विदेशी आनुवंशिक गुणों वाले क्रासब्रेड पशुओं का जिनके रख रखाव पर अधिक व्यय हो रहा है तथा पशुपालकों को यथोचित लाभ की प्राप्ति नहीं हो रही है में बैक क्रसिंग स्वदेशी गोवंश के उच्चगुणवत्तायुक्त वीर्य/वर्गीकृत वीर्य से किया जायेगा।

10           प्रजाति विशेष के प्रजनन गुणों यथा दुग्धावस्था अवधि, आहार दुग्ध अनुपात, प्रथम ब्यांत के समय उम्र, प्रथम ऋतुकाल की आयु, रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी विशेष ध्यान दिया जायेगा तथा उक्तानुसार ही पशु अनुवांशिक गुणों का निर्धारण करते हुए नर पशुओं को चिन्हित कर उच्च गुणवत्तायुक्त अतिहिमीकृत वीर्य का उत्पादन सुनिश्चित किया जायेगा।

11           मुर्रा प्रजाति की भैंसो का आनुवंशिक उच्चीकरण (अपग्रेडेशन) द्वारा विकास किया जायेगा। महिषवंशीय प्रजाति में जैसा प्रादेशिक पशु प्रजनन नीति में वर्णित है।

12           उच्चगुणवत्तायुक्त अतिहिमीकृत वीर्य द्वारा कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं को पशुपालकों के द्वार तक पहुॅचाया जायेगा।

13           स्वदेशी प्रजातियों के नर वत्सों के संरक्षण एवं विकास हेतु सतत् प्रयास किया जायेगा।

14           गिर प्रजाति के नर वत्सों का नियमित बधियाकरण किया जायेगा, जिससे अनियंत्रित प्रजनन को रोका जा सकेगा।

15           दुग्ध उत्पादन के लिये निम्न स्तरीय गोवंशीय/अवर्णित पशुओं को उच्चगुणवत्तायुक्त जर्सी/साहीवाल/थारपारकर प्रजाति के अतिहिमीकृत वीर्य से संकरण कराया जायेगा।

16           गोवंशीय पशुओं की स्थापित भारतीय मूल की प्रजातियों/लाइक (समरूप) प्रजातियों में पीढ़ी दर पीढ़ी प्रजातिवार उच्च गुणवत्तायुक्त अतिहिमीकृत वीर्य से सतत् कृत्रिम गर्भाधान द्वारा अनुवांशिक सुधार किया जायेगा।

17           संकर प्रजनन हेतु जर्सी प्रजाति के अतिहिमीकृत वीर्य का प्रयोग कृत्रिम गर्भाधान में किया जायेगा।

18           संकर संतति में विदेशी प्रजाति के रक्त को 62.5 प्रतिशत तक रखे जाने हेतु संकर मादा संतति (एफ-1) को 50-62.5 प्रतिशत विदेशी (जर्सी) रक्त के अतिहिमीकृत वीर्य से संकरण कराया जायेगा।

19           उत्तम प्रजनन एवं उच्च गुणवत्ता वाले सांड़ों की प्राप्ति हेतु वैज्ञानिक आधार पर आनुवंशिकी को दृष्टिगत रखते हुए उपलब्ध पशुधन में से चयन किया जायेगा।

20           कृत्रिम गर्भाधान तथा नैसर्गिक अभिजनन हेतु चिन्हित प्रजातियों का प्रजातिवार मानकों का निर्धारण किया जायेगा तथा समस्त मानकों को अंगीकृत करते ही केन्द्रीय मूल्यांकन इकाई (सी0एम0यू0) द्वारा प्रदत्त एवं बी ग्रेड अतिहिमीकृत वीर्य उत्पादन केन्द्रों से ही तैयार वीर्य स्ट्राज का उपयोग प्रजनन कार्य हेतु उपयोग किया जायेगा।

21           बुल मदर प्रक्षेत्रों से प्रजनन योग्य सांड प्राप्त किये जाने हेतु प्रक्षेत्रों का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। उक्त के अतिरिक्त उन क्षेत्रों से भी प्रजनन योग्य उच्च गुणवत्तायुक्त सांड़ों को चिन्हित किया जाना है जहाँ फील्ड परफारमेन्स अभिलेखन कार्यक्रम निष्पादित किया जा रहा है।

22           स्वदेशी गोवंशीय साहीवाल, हरियाना, थारपारकर एवं गंगातीरी नस्ल की प्रजातियों को जर्सी से संकर प्रजनन द्वारा एफ-1 पीढ़ी के सांड़ो का उत्पादन किया जायेगा तथा उत्पादित संकर जर्सी सांड़ों में विदेशी रक्त का प्रतिशत 62.5 प्रतिशत तक ही रखा जायेगा।

23           महिषवंशीय पशुओं के विकास हेतु मुर्रा प्रजाति का अप-ग्रेडेशन हेतु उपयोग किया जायेगा। मुर्रा सांड बुल मदर प्रक्षेत्रों से अथवा फील्ड परफारमेन्स अभिलेखन के आधार पर अथवा अन्य विश्वसनीय संस्थानो यथा सी0सी0बी0एफ0, सी0एच0आर0एस0 आदि से प्राप्त किया जायेगा।

24           नियमित संतति परीक्षण किया जाना तथा मादा संतति को उचित चिकित्सकीय/प्रबन्धन सुविधा उपलब्ध कराया जायेगा।

25           वांछित गुणों वाले सांड जो वीर्य उत्पादन हेतु प्रयुक्त नहीं किये जा सकेगें उन्हे सूदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जहाॅ कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा उपलब्ध नहीं है, नैसर्गिक अभिजनन हेतु वितरित किया जायेगा। सांडों के क्षेत्रों में वितरण से पूर्व प्रजातिवार निर्धारित न्यूनतम मानक को ध्यान में रखा जायेगा।

26           नैसर्गिक अभिजनन हेतु चिन्हित क्षेत्रों में रोग परीक्षणोपरान्त सांड़ों की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी तथा सांड़ों का चक्रानुक्रम निश्चित अवधि पर सुनिश्चित कराया जायेगा जिससे कि अन्तः प्रजनन (इनब्रीडिंग) की समस्या उत्पन्न न हो सके।

27           कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ताओं की क्षमता में विकास हेतु समय-समय पर प्रशिक्षण तथा पशुपालकों में कृत्रिम गर्भाधान/वर्गीकृत वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान को अपनाये जाने तथा लाभान्वित होने हेतु जागरूकता अभियान कार्यक्रम संचालित किये जायेगें।

28           प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान से जुड़े समस्त कार्यकर्ताओं का पंजीकरण किया जायेगा।

29           उत्पन्न संततियों की यू.आई़़.डी. टैगिंग एवं अभीलेखीकरण का कार्य अनिवार्य रूप से कराया जायेगा।

30           वर्तमान उत्पादकता के स्तरों को जानने और प्रजनन के प्रभाव की जानकारी के लिए विभिन्न क्षेत्रवार दुधारू नस्लों को डी00डी0एफ0 की मानक गाइड लाइन के अनुसार पर्यवेक्षण रिकार्डिंग सिस्टम के अधीन रखा जायेगा जैसा कि राष्ट्रीय डेयरी योजना-1 अन्तर्गत विभिन्न पी0टी0 (प्रोजनी टेस्टिंग) एवं पी0एस0 (पेडिग्री सेलेकशन) परियोजनाओं के लिए निर्धारित है।

31           प्राइवेट व्यक्तियों के द्वारा स्पूरियस सीमेन स्ट्राज का उत्पादन कर आपूर्ति करने पर प्रस्तावित ब्रीड़िंग एक्ट के अनुसार समुचित कार्यवाही की जायेगी।

32           प्रदेश में वीर्य स्ट्राज उ0प्र0 पशुधन विकास परिषद के माध्यम से ही जनपदों को कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ताओं को उपलब्ध कराने हेतु आपूर्ति की जायेगी

33           विकास खण्डवार/पशुचिकित्सालयवार निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष पशुधन प्रसार अधिकारियों, पैरावेट्स द्वारा किये जा रहे कृत्रिम गर्भाधान, उत्पन्न संततियों का सत्यापन/समीक्षा का कार्य पशुचिकित्साधिकारियों द्वारा किया जायेगा। कार्यक्रम का मूल्यांकन बाह्य संस्था से भी कराये जाने हेतु शासन के निर्देशानुसार विभाग/संस्था को चिन्हित करते हुए मूल्यांकन का कार्य कराया जायेगा।

34           पशुचिकित्साविद् अपने कार्य क्षेत्र में बांझपन समस्या से ग्रसित दुधारू पशुओं की चिकित्सा एवं दुग्ध उत्पादन में लाये जाने हेतु जिम्मेदारी दी जायेगी।  

35           प्रादेशिक पशु प्रजनन नीति की समीक्षा/पुनर्विचार प्रत्येक दस वर्षों में की जायगी।

36           कृत्रिम गर्भाधान का नियमित प्रशिक्षण कराया जाय जिसमें क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं/प्रगतिशील पशुपालकों को अवश्य सम्मिलित किया जाय तथा ब्रीड़िग पालिसी की समुचित जानकारी उनके ज्ञान स्तर को ध्यान में रखते हुए उक्तानुसार सरल भाषा में तैयार कर प्रसारित की जायेगी।  

37           दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य एवं उन्नत प्रजनन चक्र हेतु वर्ष भर हरे चारे की उपलब्धता के लिए प्रदेश में चारा नीति बनाते हुए आवश्यकतानुसार चारे की उपलब्धता सुनिष्चित की जायेगी।

38           मुख्य पशुचिकित्साधिकारियों से प्राप्त प्रजातिवार वीर्य स्ट्राज की मांग के अनुसार ही आपूर्ति सुनिश्चित की जायेगी तथा देश/प्रदेश के समस्त वीर्य उत्पादक इकाईयों को सूचना से अवगत भी कराया जायेगा। 

39           प्रजातिवार फील्ड परफारमेन्स रिकार्डिंग की जायेगी।

40           उन्नत प्रजातियों के विकास हेतु रजिस्ट्रेशन एक्ट-1860 के तहत प्रदेश के समस्त जनपदों में ब्रीडर्स एसोसिएशन एवं कम्पनी एक्ट के अंतर्गत पशुपालक उत्पादक संगठन बनाये जाने हेतु रणनीति तैयार की जायेगी ताकि पशुपालकों द्वारा उत्पादित दूध एवं अन्य पशुजन्य उत्पादों की बिक्री हेतु समुचित व्यवस्था सुनिश्चित हो सके तथा पशुपालकों को लाभकारी मूल्य की प्राप्ति हो सके।

41           गोसदन एवं गोशालाओं में प्रादेशिक पशु प्रजनन नीति के अनुरूप कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु आवश्यकतानुरूप बजट की व्यवस्था की जायेगी।

42           प्रदेश की कुछ प्रजातियों यथाः केनकथा, खेरीगढ़, पॅवार, मेवाती के संरक्षण एवं सम्बर्धन पर भी ध्यान दिया जायेगा।

43           केनकथा प्रजाति के पशुओं को राजकीय पशुधन एवं कृषि प्रक्षेत्र, सैदपुर ललितपुर तथा खेरीगढ़/पॅवार प्रजाति को राजकीय पशुधन एवं कृषि प्रक्षेत्र, मंझरा लखीमपुर खीरी पर संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु संरक्षित किया जायेगा। इन प्रजातियों के गुणवत्तायुक्त नर की उपलब्धता होने पर इनके मूल प्रजनन क्षेत्र में नैसर्गिक अभिजनन के लिए उपलब्ध कराया जायेगा।

 
 

प्रजातिवार प्रजनन संभाग

गोवंशीय प्रजाति

 

1.            साहीवाल प्रजाति का प्रजनन क्षेत्र बुन्देलखण्ड को छोड़ कर प्रदेश के शेष जनपदों में चिन्हित है, परन्तु बुन्देलखण्ड क्षेत्र में पशुपालकों की मांग के अनुसार साहीवाल प्रजाति का अतिहिमीकृत वीर्य/वर्गीकृत वीर्य उपलब्ध कराया जायेगा।

2.            हरियाना प्रजाति का प्रजनन क्षेत्र पश्चिम संभाग के जनपदों में चिन्हित है परन्तु बुन्देलखण्ड क्षेत्र को छोड़ कर प्रदेश में किसी भी जनपद में पशुपालकों की मांग के अनुसार हरियाना प्रजाति का अतिहिमीकृत वीर्य/वर्गीकृत वीर्य उपलब्ध कराया जायेगा।

3.            गंगातीरी प्रजाति का प्रजनन क्षेत्र पूर्वी संभाग के जनपदों में चिन्हित है।

4.            थारपारकर प्रजाति का प्रजनन क्षेत्र बुन्देलखण्ड संभाग के जनपदों में चिन्हित है।

5.            गिर प्रजाति का अतिहिमीकृत वीर्य/वर्गीकृत वीर्य पशुपालकों की माँग के अनुरूप प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान हेतु उपलब्ध कराया जायेगा।

6.            जर्सी प्रजाति का प्रजनन क्षेत्र प्रदेश के समस्त जनपदों में चिन्हित है।

7.            होल्स्टीन फ्रीजीयन प्रजाति का प्रजनन क्षेत्र बुन्देलखण्ड को छोड़ कर प्रदेश के शेष जनपदों में चिन्हित है परन्तु पशुपालकों की माॅग के अनुसार इस प्रजाति का अतिहिमीकृत वीर्य/वर्गीकृत वीर्य उपलब्ध कराया जायेगा।

8.            केनकथा प्रजाति के पशुओं को राजकीय पशुधन एवं कृषि प्रक्षेत्र, सैदपुर ललितपुर तथा खेरीगढ़/पॅवार प्रजाति को राजकीय पशुधन एवं कृषि प्रक्षेत्र, मंझरा लखीमपुर खीरी पर संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु संरक्षित किया जायेगा।

 महिषवंषीय प्रजाति

 1.            मुर्रा प्रजाति का प्रजनन क्षेत्र प्रदेष के समस्त जनपदों में चिन्हित है।

2.            भदावरी प्रजाति का प्रजनन क्षेत्र यमुना एवं चम्बल नदी का किनारा, आगरा (भदावर), जालौन (माधौगढ), इटावा एवं औरैया चिन्हित है।

 विदेशी प्रजाति के रक्त प्रतिशत की अधिकतम बाध्यता संकर प्रजनन में विदेशी नस्ल का रक्त प्रतिशत 62.5 तक ही सीमित रखा जाना है।

 

 

 

संभागवार, प्रजातिवार विवरण

 

पुनरीक्षित पशुप्रजनन नीति 2018 (उत्तर प्रदेश)

क्षेत्र/संभाग

अन्य क्षेत्र/संभाग (अतिहिमीकृत वीर्य की आपूर्ति)

प्रजाति

प्रथम संकरण

 

तद् संकरण

 

 

सांड

लक्षित समूह

सांड

लक्षित समूह

 

गोवंशीय

शुद्ध   साहीवाल

अवर्णित

शुद्ध   साहीवाल      

साहीवाल (ग्रेडेड)  

मध्य संभाग

अन्य संभाग बुन्देलखण्ड के अतिरिक्त (पशुपालकों की मांग पर आपूर्ति की जायेगी)

 

शुद्ध   साहीवाल

साहीवाल (ग्रेडेड)      

शुद्ध   साहीवाल      

शुद्ध   साहीवाल 

 

शुद्ध   साहीवाल

शुद्ध   साहीवाल      

शुद्ध   साहीवाल      

शुद्ध   साहीवाल 

 

शुद्ध हरियाना

अवर्णित

शुद्ध हरियाना

हरियाना (ग्रेडेड)

पश्चिमी संभाग

अन्य संभाग बुन्देलखण्ड के अतिरिक्त

 

 

शुद्ध हरियाना

हरियाना (ग्रेडेड)      

शुद्ध हरियाना

शुद्ध हरियाना

 

शुद्ध हरियाना

शुद्ध हरियाना

शुद्ध हरियाना

शुद्ध हरियाना

 

शुद्ध गंगातीरी

अवर्णित

शुद्ध गंगातीरी

गंगातीरी (ग्रेडेड) 

पूर्वी संभाग

कोई नही

 

शुद्ध गंगातीरी

गंगातीरी (ग्रेडेड)      

शुद्ध गंगातीरी

शुद्ध गंगातीरी

 

शुद्ध गंगातीरी

शुद्ध गंगातीरी

शुद्ध गंगातीरी

शुद्ध गंगातीरी

 

शुद्ध थारपारकर

अवर्णित

शुद्ध थारपारकर

थारपारकर (ग्रेडेड)

बुन्देलखण्ड संभाग

-

 

शुद्ध थारपारकर

थारपारकर (ग्रेडेड)

शुद्ध थारपारकर

शुद्ध थारपारकर

 

 

 

शुद्ध थारपारकर

शुद्ध थारपारकर

शुद्ध थारपारकर

शुद्ध थारपारकर

 

 

 

शुद्ध जर्सी

शुद्ध जर्सी

शुद्ध जर्सी

शुद्ध जर्सी

सम्पूर्ण प्रदेश

 

 

शुद्ध जर्सी

अवर्णित सीमित स्तर

संकर जर्सी

संकर जर्सी

 

 

 

संकर जर्सी

संकर जर्सी

संकर जर्सी

संकर जर्सी

 

 

 

शुद्ध होल्स्टीन फ्रीजीयन

शुद्ध होल्स्टीन फ्रीजीयन

शुद्ध होल्स्टीन फ्रीजीयन

शुद्ध होल्स्टीन फ्रीजीयन

बुन्देलखण्ड संभाग के अतिरिक्त सम्पूर्ण प्रदेश

 

शुद्ध होल्स्टीन फ्रीजीयन

अवर्णित सीमित स्तर

संकर होल्स्टीन फ्रीजीयन

संकर होल्स्टीन फ्रीजीयन

महिषवंशीय

शुद्ध मुर्रा

अवर्णित

शुद्ध मुर्रा

अवर्णित

सम्पूर्ण प्रदेश

 

शुद्ध मुर्रा

मुर्रा (ग्रेडेड)         

शुद्ध मुर्रा

मुर्रा (ग्रेडेड)      

 

शुद्ध मुर्रा

शुद्ध मुर्रा

शुद्ध मुर्रा

शुद्ध मुर्रा

 

शुद्ध भदावरी

अवर्णित

शुद्ध भदावरी

अवर्णित

यमुना एवं चम्बल नदी का किनारा, आगरा(भदावर), जालौन(माधौगढ), इटावा, औरैया।

 

शुद्ध भदावरी

भदावरी (ग्रेडेड)                

शुद्ध भदावरी

भदावरी (ग्रेडेड)   

 

शुद्ध भदावरी

शुद्ध भदावरी

शुद्ध भदावरी

शुद्ध भदावरी

नोट-संकर प्रजनन हेतु विदेशी नस्ल के अनुवांशिक गुणों का स्तर 62.5 प्रतिशत तक ही सीमित रखा जाना है।