पशुधन गणना

पशुधन गणना के मुख्य बिन्दु

   अखिल भारतीय पशुधन गणना पाँच वर्षो के अन्तराल पर पूरे देश में आयोजित की जाती हैं यह प्रक्रिया ब्रिटिश भारत में 1919-20 में पशुधन से सम्बन्धित सूचनायें एकत्र करने हेतु सीमित क्षेत्रों में शुरू की गयी थी द्वितीय पशुधन गणना 1924-25 में उन्ही बिन्दुओं पर की गयी तदुपरान्त प्रत्येक पशुधन गणना में अवधारणाओं और परिभाषाओं के बदलाव के साथ सीमाओं और आच्छादन का विस्तार होता चला गया

   आजादी के बाद प्रथम पशुधन गणना वर्ष 1951 में आयोजित की गयी तथा उत्तरोत्तर हर पाँचवे वर्ष यह गणना आयोजित की जाती हैं

   पशुधन गणना के क्रम में वर्तमान पशुधन गणना 2017 पशुधन गणना की 20वी कड़ी है ।

 

20वीं पशुधन गणना की मुख्य विशेषतायें

 

 

19वीं पशुधन गणना के आंकडे

  2007 से 2012 तक की अंतरसंगणना अवधि के दौरान पशुधन संख्या 639.65 लाख से बढ़कर 697.25 लाख हो गयी जो संख्या में 9.00 प्रतिशत की वृद्वि दर्शाता हैं

 

  19वीं पशुधन संगणना में शामिल पशुओं में से 29.50 प्रतिशत गौवंशीय पशु, 43.92 प्रतिशत महिषवंशीय पशु, 1.94 प्रतिशत भेंड़, 22.35 प्रतिशत बकरी 1.91 प्रतिशत सूकर हैं अन्य पशुधन (घोड़े, टट्टू, खच्चर, गधे ऊँट) की संख्या कुल पशुधन का 0.37 प्रतिशत थी 18वीं पशुधन संगणना के अनुसार उपरोक्त आँकड़े क्रमशः 29.86 प्रतिशत, 41.34 प्रतिशत, 2.19 प्रतिशत, 23.18 प्रतिशत, 3.11 प्रतिशत और 0.33 प्रतिशत थे

  19वीं पशुधन संगणना में गौवंशीय पशुओं की संख्या विगत पशुधन संगणना से 7.69 प्रतिशत, महिषवंशीय 15.83 प्रतिशत, बकरी 5.10 प्रतिशत अन्य पशुधन (घोड़े, टट्टू, गघें, खच्चर ऊँट) की संख्या में 22.64 प्रतिशत की वृद्वि हुई भेड़ों की संख्या में 3.29 प्रतिशत सूकर की संख्या में 32.86 प्रतिशत का हास हुआ

  कुल दुधारू (दूध दे रही सूखी एक साथ) गौवंशीय पशुओं की संख्या 59.51 लाख से बढ़कर 82.55 लाख हुई हैं, वृद्वि का प्रतिशत 38.72 हैं विदेशी और संकरित दुधारू गौवंशीय पशुओं की संख्या 7.10 लाख से बढ़कर 16.60 लाख हुई, वृद्वि प्रतिशत 133.80 हैं जबकि स्वदेशी दूधारू गौवंशीय पशुओं की संख्या 52.41 लाख से बढ़कर 65.95 लाख हुई, वृद्वि का प्रतिशत 25.83 हैं

  दूध दे रही कुल गौवंशीय पशुओं की संख्या 45.47 लाख से बढ़कर 58.83 लाख हुई, वृद्वि का प्रतिशत 29.38 हैं विदेशी संकरित दूध दे रही गौवंशीय पशुओं की संख्या 5.42 लाख से बढ़कर 12.15 लाख हुई, वृद्वि का प्रतिशत 124.17 हैं जबकि स्वदेशी दूध दे रही गौवंशीय पशुओं की संख्या 40.05 लाख से बढ़कर 46.68 लाख हुई, वृद्वि का प्रतिशत 16.55 हैं

  कुल प्रजनन योग्य गौवंशीय पशुओं की संख्या 63.90 लाख से बढ़कर 89.08 लाख हुई, वृद्वि का प्रतिशत 39.41 हैं विदेशी संकरित प्रजनन योग्य गौवंशीय पशुओं की संख्या 7.62 लाख से बढ़कर 17.96 लाख हुई, वृद्वि का प्रतिशत 135.70 हैं जबकि स्वदेशी प्रजनन योग्य गौवंशीय पशुओं की संख्या 56.28 लाख से बढ़कर 71.12 लाख हुई, वृद्वि का प्रतिशत 26.37 हैं

  कुल दुधारू, दूध दे रही प्रजनन योग्य महिषवंशीय पशुओं की संख्या क्रमशः 117.61 लाख से 139.50 लाख, 91.86 लाख से 105.38 लाख तथा 125.87 लाख से 151.03 लाख बढ़ी, वृद्वि का प्रतिशत क्रमशः 18.61, 14.72 और 19.99 हैं  

उद्देश्य

   पशुपालन देश के ग्रामीण क्षेत्रों में एक अत्यन्त महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि हैं जिससे कृषि पर निर्भर परिवारों को अनुपूरक आय प्राप्त होती हैं परिवारों को सहायक आय प्रदान करने के अतिरिक्त गौवंशीय, महिषवंशीय, भेंड़, बकरी, सूकर, मुर्गीपालन आदि के रूप में पशुओं के पालन के अलावा दूध, अंडे और मांस के रूप में पोषण का एक स्रोत हैं यह देखा गया हैं कि सूखा और अन्य प्राकृतिक विपदाओं जैसे आकस्मिकताओं के समय पशुधन ही भारी संख्या में ग्रामीणों के काम आता हैं चूकि पशुधन के स्वामित्व को समान रूप से भूमिहीन कामगारों, मजदूरों, छोटे और सीमान्त कृषकों में वितरित किया गया हैं इसलिए इस क्षेत्र में प्रगति से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में संतुलित रूप से विकास हो पाएगा

   पशुधन संगणना प्रशासनिक योजनाकारों, पशुपालन, वैज्ञानिकों और अन्य जो इस क्षेत्र के विकास में कार्यरत हो, के लिए उपयोगी सिद्व हो सकती हैं पशुओं के क्षेत्र में उचित योजना बनाने, कार्यक्रम तैयार करने, पुनर्निमाण करने एवं विभिन्न योजनाओं को सही दिशा देने, पशुधन के क्षेत्र में त्वरित उचित विकास प्रदान करने में पशुधन संगणना के आंकड़े राज्य के लिए सहायक होगें

लाभ

   पशुपालन क्षेत्र में कम निवेश के साथ भी वृद्वि होने की काफी संभावनाएं विघमान हैं इस क्षेत्र में किसी नीति/कार्यक्रम की योजना  तैयार करने के लिए, उनके प्रभावी क्रियान्वयन, उनके प्रभाव का अनुश्रवण और मूल्यांकन, संख्याओं का अनुमान, मूल आंकड़े हैं, जो पशुधन संगणना पर आधारित हैं पशुधन की आयु, लिंग इत्यादि सहित श्रेणीवार आधार पर पशुधन संख्या की विस्तृत सूचना का यह एक मात्र स्रोत हैं इससे कुक्कुट और पशुधन क्षेत्र में उपयोग होने वाले उपकरण तथा मशीनरी पर भी अलग से सूचना प्राप्त होती हैं अखिल भारतीय आधार पर यह गणना की जाती हैं और ग्रामीण/शहरी ब्यौरे के साथ जिलेवार सूचना को शामिल किया जाता हैं पशुधन संगणना को एक नमूने की तरह उपयोग किया जाता हैं