गाय/भैंसों के में कृत्रिम गर्भाधान एवं प्राकृतिक गर्भाधान द्वारा पशु प्रजनन की सुविधाओं का सुधार एवं विस्तार तथा बैंफ के माध्यम से प्रजनन की सुविधाए उपलब्ध कराने की योजना

  

मुख्य बिन्दु-

                    योजनान्तर्गत प्रदेश के 75 जिलों में कार्यरत विभागीय संस्थाओं के माध्यम से प्रदेश के पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा उपलब्ध कराकर उन्नत प्रजाति के दुधारू पशुओं को उत्पादित किया जा रहा है। योजना से प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में निवास कर रहे पशुपालकों को उन्नत प्रजाति के पशु प्राप्त होंगे और उनमें दुग्ध उत्पादन की क्षमता के वृद्धि होगी। जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

 

उद्देश्य-

                 यद्यपि प्रदेश दुग्ध उत्पादन के मामले में देश में प्रथम स्थान पर है तदापि प्रति पशु दुग्ध उत्पादन क्षमता देश के अन्य राज्यों से काफी कम है, जिसका मुख्य कारण प्रदेश में उच्च गुणवत्ता के पशुओं का न होना है। गाय एवं भैंसों में उच्च उत्पादक क्षमता के साड़ों के वीर्य से प्रदेश के पशुपालकों के मादा पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान कराकर उनसे उच्च गुणवत्ता युक्त संतति का उत्पादन करना है जिससे वे प्रौढ़ होने पर गर्भ धारण करने के पश्चात् बच्चा देने पर अधिक दुग्ध उत्पादन करेंगी। कृमित्र गर्भाधान से मादा पशुओं में होने वाली प्रजनन संबंधी बीमारियों की रोकथाम में कमी आयेगी।

 

लाभः-

               कृत्रिम गर्भाधान द्वारा पशुपालकों की मादा गायों एवं भैंसों को उच्च उत्पादक क्षमता के नर साड़ों के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान के उपरान्त उत्पन्न संतति उच्च उत्पादक क्षमता की होगी जो प्रौढ़ होने पर गर्भ धारण के उपरान्त बच्चा देने पर अधिक दूध का उत्पादन करेंगी जिससे पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी एवं उनके आर्थिक स्तर के उन्नयन होगा तथा प्रदेष में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी। कृत्रिम गर्भाधान के उपरान्त उत्पन्न संतति उच्च उत्पादन क्षमता की होगी जो कम समय में प्रजनन योग्य हो जायेगी।

 

                                           

 अधिक जानकारी हेतु सम्पर्क करें -      डा0 एस.एन.सिंह  

                                            अपर निदेशक गो0वि0

                                            निदेशालय पशुपालन विभाग

                                            उ0प्र0 लखनऊ

                                            मो0- 9935508955